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इतिहास पुष्यभूति एवं चौहान वंश भाग-08

Profile photo of Ravi Kumar Ravi Kumar
April 14, 2018


हेलो दोस्तों मैं हूँ आपका दोस्त रवि कुमार । मैं आपलोगों के लिए फिर से एक नया अंक ले कर आया हूँ। इतिहास के इस नए अंक में मैं आपलोगों को पुष्यभूति एवं चौहान वंश से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नों से रूबरू करवा रहा हूँ। इतिहास एक ऐसा भाग है जिससे संबंधित प्रश्न हरेक एग्जाम जैसे कि SSC , JSSC , RAILWAY और राज्यों से संबंधित एग्जाम आदि में पूछे जाते हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए मैं इतिहास से जुड़े सारे तथ्यों को आपके समक्ष रखता हूँ। मैंने अपने पिछले अंक में ” इतिहास गुप्त साम्राज्य भाग – 7 ” के बारे में लिखा था।

इतिहास पुष्यभूति एवं चौहान वंश

पुष्यभूति वंश

* पुष्यभूति वंश का संस्थापक  –  नरवर्धन

* पुष्यभूति वंश की स्थापना   –  हरियाणा के थानेश्वर में की गई थी

* इस वंश का सबसे शक्तिशाली शासक  –  प्रभाकर वर्धन

* प्रभाकर वर्धन के बाद किसने शासन किया   –  राज्यवर्धन

* राज्यवर्धन की हत्या ( गौड़ शासक शशांक ने इसकी हत्या की ) हो जाने के बाद 16 वर्ष की आयु में हर्षवर्धन गद्दी पर बैठ ( 606 ई. में )

* हर्षवर्धन शिव का उपासक था।

* हर्षवर्धन के शासनकाल में चीनी यात्री ह्वेनसांग भारत आया था।

* हर्षवर्धन के दरबार का प्रसिद्ध कवि कौन था  –  बाणभट्ट

* बाणभट्ट की प्रमुख पुस्तक  –  हर्षचरित

* नागानंद , प्रियदर्शिका और रत्नावली नामक पुस्तक के लेखक हर्षवर्धन थे।

* हर्षवर्धन प्रतिदिन 500 ब्राह्मणों और 100 बौद्ध भिक्षुओं को खाना खिलाता था।

* हर्षवर्धन को शिलादित्य के नाम से भी जाना जाता था।

* हर्षवर्धन ने प्रयाग में दो विशाल सभाओं का आयोजन भी किया था , इसमें एक मौक्ष परिसर के नाम से जाना जाता है।

चौहान वंश 

* चौहान वंश का संस्थापक   –   वासुदेव

* इस वंश का सबसे शक्तिशाली शासक   –  विग्रहराज-4 वीसलदेव

* अजमेर शहर की स्थापना किसने की   –   अजयराज द्वितीय

* चौहान वंश की प्रारंभिक राजधानी कहाँ थी   –   अहिच्छत्र

* विग्रहराज-4 के राजकवि   –   सोमदेव

* इस वंश का अंतिम शासक  –   पृथ्वीराज तृतीय ( पृथ्वीराज चौहान )

* पृथ्वीराज चौहान का राजकवि   –   चंदवरदाई

* पृथ्वीराज रासो पुस्तक की रचना किसने की  –  चंदवरदाई

* पृथ्वीराज चौहान ने रणथंभौर का जैन मंदिर का निर्माण कराया था।

* तराइन का प्रथम युद्ध पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच 1191 में हुआ था , जिसमे गौरी की हार हुई थी।

* तराइन का द्वितीय युद्ध 1192 में हुआ था , इसमें मोहम्मद गौरी की जीत हुई थी और पृथ्वीराज की हार हुई थी।

मुझे उम्मीद है कि आपलोग जरूर इन तथ्यों को पढ़ेंगे एवं इससे संबंधित प्रश्नों को याद करेंगे। अधिक जानकारी के लिए आपलोग वेबसाइट को विजिट करें , ग्रुप जॉइन करें एवं मुझे फॉलो करें।



Ravi Kumar

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I am a B.Ed. student at k.k.m college pakur. I am interested in teaching and sharing my knowledge. I love to teach math to students.

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