What will you learn today ?

Favteacher is a knowledge sharing website run by students and teachers of India like you. Join now and become the part of learning community. Share your knowledge to the world.

Members- 375

Views 68

पृथ्वी की भौगोलिक संरचना भूगोल नोट्स भाग 2

Profile photo of Ravi Kumar Ravi Kumar
April 17, 2018


मैं आपलोगों के सामने फिर से एक नए पोस्ट के साथ हाजिर हूँ। आज मैं इस पोस्ट में पृथ्वी की भौगोलिक संरचना के बारे में बताने जा रहा हूँ। इसके अंतर्गत आनेवले टोपिक होंगे पृथ्वी की आंतरिक संरचना  , चट्टान , घास के मैदान , जलमंडल , ज्वार- भाटा , वायुमंडल और वायुमंडल की संरचना । मेरा पिछला पोस्ट था ” सोलर  सिस्टम भूगोल नोट्स भाग 1 ” .

पृथ्वी की आंतरिक संरचना

★ भू – पर्पटी ( Crust ) : – पृथ्वी के ऊपरी भाग को भू – पर्पटी कहते है। यह अंदर की तरफ 34 किमी तक का क्षेत्र है। यह मुख्यतः बेसाल्ट चट्टानों से बना है। इसके दो भाग हैं – 1 सियाल ( SIAL ) और 2 सीमा ( SIMA ) । सियाल क्षेत्र में सिलिकन एवं एलुमिना और सीमा क्षेत्र में सिलिकन एवं मैग्नेशियम की बहुलता होती है।

★ मेन्टल ( Mantle ) : – 2900 किमी मोटा क्षेत्र मुख्यतः बैसाल्ट चट्टानों से बना है। Mantle के इस हिस्से में मेग्मा चैम्बर पाए जाते है।

★ केन्दीय भाग ( Core ) : – पृथ्वी के केंद्र के क्षेत्र को केंद्रीय भाग( Core ) कहते है। यह क्षेत्र निकेल एवं फेरस का बना होता है।

* सर आइजक न्यूटन ने साबित किया कि पृथ्वी नारंगी के समान है।

* जेम्स जीन ने इसे नारंगी के बजाय नाशपाती के समान बतलाया ।

* पृथ्वी के कुल 29% भाग पर स्थल एवं 71% भाग पर जल है।

* पृथ्वी की अधिकतम ऊँचाई माउंट एवरेस्ट ( 8850 मी. ) की तथा अधिकतम गहराई मेरियाना गर्त ( 11,033 मी. ) की है। इस प्रकार पृथ्वी की अधिकतम ऊँचाई एवं अधिकतम गहराई में लगभग 20 किमी का अंतर है।

चट्टान

★ आग्नेय चट्टान ( Igneous rock ) : – यह मैग्मा या लावा के जमने से बनती है। जैसे – ग्रेनाइट , बैसाल्ट , पेगमाटाइट , डायोराइट , ग्रेबो आदि।

★ पेगमाटाइट : – कोडरमा ( झारखंड ) में पाया जाने वाला अभ्रक इन्ही शैलो में मिलता है।

★ अवसादी चट्टान : – बलुआ पत्थर , चूना पत्थर , स्लेट , कांगलोमरेट , नमक की चट्टान एवं शेलखरी आदि।

◆ घास के मैदान : – घास – भूमियों को दो वर्गों में विभाजित किया गया है।

★ उष्ण कटिबंधीय घास – भूमियाँ : – इसे अलग – 2 देशों में अलग – 2 नाम से जाना जाता है , जैसे – सवाना ( अफ्रीका ) , कम्पोज ( ब्राजील ) , लानोस ( वेनेजुएला व कोलंबिया )

★ शीतोष्ण कटिबंधीय घास – भूमियाँ : – इसे निम्न नाम से जाना जाता है – प्रेयरी ( USA व कनाडा ) , पम्पास ( अर्जेन्टीना ) , वेल्ड ( दक्षिण अफ्रीका ) , डाउन्स ( आस्ट्रेलिया ) , स्टेपी ( एशिया ,यूक्रेन , रूस , चीन के मंचूरिया प्रदेश )

जलमंडल

* सम्पूर्ण पृथ्वी का 3/4 भाग ( लगभग 71 % ) पर जलमंडल का विस्तार है। पृथ्वी पर उपस्थित जल की कुल मात्रा का जल महासागरों में है , जो खारा है। जल राशि का मात्र 2.5% भाग ही स्वच्छ जल या मीठा जल है।

* सामान्यतः महासागरीय जल का तापमान लगभग 5℃ से 33℃ के बीच रहता है।

* तुर्की की वान झील की लवणता सबसे अधिक ( 330 % ) है।

ज्वार – भाटा ( Tides ) : – चंद्रमा एवं सूर्य की आकर्षण शक्तियों के कारण सागरीय जल के ऊपर उठने तथा गिरने को ज्वार – भाटा कहते है। सागरीय जल के ऊपर उठकर आगे बढ़ने को ज्वार ( Tide ) तथा सागरीय जल को नीचे गिरकर पीछे लौटने ( सागर की ओर ) को भाटा ( Ebb ) कहते है।

* चंद्रमा का ज्वार – उत्पादक बल सूर्य की अपेक्षा दुगुना होता है , क्योकि यह सूर्य की तुलना में पृथ्वी के अधिक निकट है।

* अमावस्या और पूर्णिमा के दिन चंद्रमा , सूर्य एवं पृथ्वी एक सीध में होते है। अतः इस दिन उच्च ज्वार उत्पन्न होता है।

* ज्वार प्रतिदिन दो बार आते है – एक बार चंद्रमा के आकर्षण से और दूसरी बार पृथ्वी के अपकेन्द्रीय बल के कारण।

* महासागरीय जल का उच्चतम वार्षिक तापक्रम अगस्त में एवं न्यूनतम वार्षिक तापक्रम फरवरी में अंकित किया जाता है।

 वायुमंडल

* वायुमंडल की ऊपरी परत के अध्ययन को वायुर्विज्ञान ( Aerology ) और निचली परत के अध्ययन को ऋतु विज्ञान ( Meterology ) कहते है। आयतन के अनुसार वायुमंडल में ( तीस मील के अंदर ) विभिन्न गैसों का मिश्रण इस प्रकार है – नाइट्रोजन 78.07% , ऑक्सीजन 20.93% , कार्बन डाइऑक्साइड .03% और ऑर्गन .93%।

* कार्बन डाइऑक्साइड : – यह काँच घर या पौधा घर ( Green house ) प्रभाव के लिए उत्तरदायी है और वायुमंडल के निचली परत को गर्म रखती है।

* आकाश का रंग नीला धूलकण के कारण ही दिखाई देता है।

◆ वायुमंडल की संरचना : –

* वायुमंडल को निम्न परतों में बाँटा गया है।

1 क्षोभ मंडल ( Troposphere )

2 समताप मंडल ( Stratosphere )

3 ओजोन मंडल ( Ozonoshpere )

4 आयन मंडल ( Ionosphere )

5 बाह्य मंडल ( Exosphere )

1 क्षोभ मंडल ( Troposphere ) : –   यह वायुमंडल की सबसे नीचे वाली परत है। इसकी ऊँचाई ध्रुवों पर 8 किमी तथा विषुवत रेखा पर लगभग 18 किमी होती है। सभी वायुमंडलीय घटनाए जैसे बादल , आँधी एवं वर्षा इसी मंडल में होती है। इस मंडल को संवहन मंडल कहते है , क्योकि संवहन धाराएँ इसी मंडल की सीमा तक सीमित होती है। इस मंडल को अधो मंडल कहते है।

2 समताप मंडल ( Stratosphere ) : –   समताप मंडल 18 से 32 किमी की ऊँचाई तक है। इसमें ताप समान रहता है। इस मंडल में वायुयान उड़ाने की आदर्श दशा पायी जाती है। कभी – कभी इस मंडल में विशेष प्रकार के मेघों का निर्माण होता , जिन्हें मुलाभ मेघ ( Mother of pearl cloud ) कहते है।

3 ओजोन मंडल ( Ozonosphere) : –   धरातल से 32 से 60 किमी के मध्य को ओजोन मंडल कहते है। इस मंडल में ओजोन गैस की एक परत होती है , जो सूर्य से आने वाली पराबैगनी किरणों को अवशोषित कर लेती है इसलिए इसे पृथ्वी का सुरक्षा कवच कहते है। ओजोन परत की मोटाई मापने में डॉबसन इकाई का प्रयोग किया जाता है।

4 आयन मंडल ( Ionoshpere ) : –   इसकी ऊँचाई 60 से 640 किमी होती है। सभी संचार उपग्रह इसी मंडल में अवस्थित होते है।

5 बाह्य मंडल ( Exoshpere ) : –   640 किमी से ऊपर के भाग को बाह्य मंडल कहते है। इस मंडल में हाइड्रोजन एवं हीलियम गैस की प्रधानता होती है।

मुझे उम्मीद है आपलोगो को ये तथ्य आने वाले परीक्षाओं में मददगार साबित हो। ज्यादा जानकारी के लिए आपलोग वेबसाइट को जॉइन करें एवं ग्रुप को जॉइन करे।



Ravi Kumar

Profile Photo

I am a B.Ed. student at k.k.m college pakur. I am interested in teaching and sharing my knowledge. I love to teach math to students.

Connect With Me

Leave a Comment

Skip to toolbar